नीली आँखें - डरावनी कहानियाँ





नीली चोटें - डरावनी कहानियाँ



नीली चोटें - डरावनी कहानियाँ


 बात तब की है जब मैं 3 या 4 साल का हो रहा हूँ! उस समय हम गांव में ही रहते थे! मुझे रोज रात को खिड़की के बाहर एक और दिखाई देता था! जबकि राइट वाली पहनी हुई थी और उसकी छत नीली हुई थी! वह मुझे बुलाती थी! मैं बहुत डर गया था और अपनी माँ को पकड़ कर सो गया था! कुछ दिनों में हम आपके साथ शहर में रहेंगे! गाँव का घर खाली हो गया! हमारा गांव भी कम होने लगा! अब बस ब्याह में गांव हो जाता है! वह भी केवल मेरे माता-पिता ही जाते हैं! मैं अपने गाँव के बारे में लगभग सब कुछ भूल चुका था! रात में दिखनेवाले और मैं भी स्वप्न को समझने लगा! मेरे अंकल के लडके की शादी थी! मैं करीब 15-16 साल बाद गांव गया था! मैंने अपना घर भी स्पष्ट किया था! हम अपने घर में ही रुके थे! एक रात अचानक मेरी नींद खुली! मैंने खिड़की से बहर देखा तो वही और नज़र आई! उसकी नीली नींद चमक रही थी और वो पहले की तरह बुला रही थी!  


 मैं काफी डर गया और भगवान को याद करने लगा! मैंने जल्दी से खिड़की बंद कर दी! उस रात मुझे नींद नहीं आई! मैं अगले दिन से अपने घर पर सोया नहीं और उसके बाद से मैं गांव भी नहीं गया!

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