चुड़ैल की शादी - डरावनी कहानियाँ #PASSG

 चुड़ैल की शादी - डरावनी कहानियाँ




चुड़ैल की शादी - डरावनी कहानियाँ


 उस समय रमेश की उम्र कोई 22-23 साल थी और आप लोगों को पता ही है कि गांवों में इस उम्र में लोग बच्चों के बाप बन जाते हैं मतलब परिणय-बंधन में तो बंधे ही जाते हैं। हाँ तो रमेश की भी शादी लगभग 4-5 साल हो गए थे और ध्रेड़-दो साल पहले ही उसकी गौना हुई थी। उस समय रमेश घर पर ही रहता था और अपने एम.ए. की पढ़ाई पूरी कर रहा था। यह घटना उस समय घटी जब रमेश एक 20-25 दिन की सुंदर बच्ची का पिता हो गया था। हाँ एक बात मैं आप लोगों को बताता हूँ कि रमेश की इब्न बहुत ही निडर स्वभाव की महिला थी। यह गुण बताता है इसलिए आवश्यक था कि इस कहानी की पुष्टि में इसकी निडरता अहम भूमिका है। एक दिन की बात है कि रमेश की बिनी ने अपनी निडरता का परिचय दिया और अपनी नन्ही सी बच्ची (उम्र लगभग एक माह से कम ही) और रमेश को देखने पर सोता हुआ चार बजे सुबह उठ गया। (गाँवों में आज-कल तो लोग पाखाना-घर बनवाने लगे हैं पर 10-12 साल पहले तक ज्यादातर घरों की महिलाओं को नित्य-क्रिया (दिशा-मैदान) ली गई थी से बाहर ही जाना पड़ा और घर की सब औरतें नहीं तो कम से कम दो एक साथ घर से बाहर निकल गए।  


 अरे भाई वह रोज चार बजे ही जगती था पर निडरता का परिचय इसलिए कह रहा हूं कि और दिनों की तरह उसने घर के किसी महिला सदस्य को दुनिया या अकेले ही मैदान की दिशा घर से बाहर निकल मांगी। (दरअसल गाँव में लड़ाईकोरी महिला (जच्चा) जिसका बच्चा अभी 6 महीने तक का न हुआ हो उसे अलवँती बोलता है और ऐसा कहता है कि ऐसी महिला पर भूत-प्रेत की छाया जल्दी पड़ जाती है या भूत-प्रेत ऐसी महिला को जल्दी घेर लेती है में ले रहे हैं।  


 इसलिए ये अलवाँती औरतें जिस घर में रहती हैं वहाँ आग जलाकर रखती हैं या कुछ लोगों के ठप्पियों के नीचे चाकू आदि रखते हैं।) मेहता की इब्न ने अपनी निडरता दिखाई और वह निडरता उस पर भारी पड़ी  


वह अकेले घर से काफी दूर खेतों की ओर निकल पड़े। हुआ यह उसी समय पंडीजी के श्रीफल (बेल) पर रहने वाली विच दिशा घुमा रही थी और न चाहते हुए भी उसने रमेश की इब्न पर अपना डेरा डाल दिया।  


 हाँ फर्क सिर्फ इतना था कि वह पहले दूर-दूर से ही रमेश की बीबी का पीछा करती रही पर अंततः उसने अपने आप को रोक नहीं पाई और ज्यों ही रमेश की बीबी घर पहुँची उस पर सवार हो गई।  


 रमेश भी लगभग 5 बजे जगा और भैंस आदि को चारा देने के लिए घर से बाहर चला गया। जब वह घर में वापस आया तो अपनी बीबी की हरकतों में बदलाव देखा। उसने देखा कि उसकी बच्ची रो रही है पर उसकी बीबी आराम से पलंग पर बैठकर पैर पसारे हुए कुछ गुनगुना रही है।  


 रमेश एकबार अपनी रोती हुई बच्ची को देखा और दूसरी बार दाँत निपोड़ते और पलंग पर बेखौफ बैठी हुई अपनी बीबी को। उसको गुस्सा आया और उसने बच्ची को अपनी गोद में उठा लिया और अपनी बीबी पर गरजा, बच्ची रो रही है और तुम्हारे कान पर जूँ तक नहीं रेंग रही है।  


 अरे यह क्या रमेश की बीबी ने तो रमेश के इस गुस्से को नजरअंदाज कर दिया और अपने में ही मस्त बनी रही। रमेश का गुस्सा और बढ़े इससे पहले ही रमेश की भाभी वहाँ आ गईं और रमेश की गोदी में से बच्ची को लेते हुए उसे बाहर जाने के लिए कहा।  


 अरे यह क्या रमेश का गुस्सा तो अब और भी बढ़ गया, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आज क्या हो रहा है, जो औरत (उसकी बीबी) अपने से बड़ों के उस घर में आते ही पलंग पर से खड़ी हो जाती थी वही बीबी आज उसके भाभी के आने के बाद भी पलंग पर आराम से बैठे मुस्कुरा रही है।  


 खैर रमेश तो कुछ नहीं समझा पर उसकी भाभी को सबकुछ समझ में आ गया और वे हँसने लगी। रमेश को अपनी भाभी का हँसना मूर्खतापूर्ण लगा और वह अपने भाभी से बोल पड़ा, अरे आपको क्या हुआ? ये उलटी-पुलटी हरकतें कर रही है और आप हैं कि हँसे जा रही हैं। रमेश के इतना कहते ही उसकी भाभी ने उसे मुस्कुराते हुए जबरदस्ती बाहर जाने के लिए कहा और यह भी कहा कि बाहर से दादाजी को बुला लीजिए।  


 भाभी के इतना कहते ही कि दादाजी को बुला लाइए, रमेश सब समझ गया और वह बाहर न जाकर अपनी बीबी के पास ही पलंग पर बैठ गया। इतने ही देर में रमेश के घर की सभी महिलाएँ वहाँ एकत्र हो गई थीं और अगल-बगल के घरों के भी कुछ नर-नारी।  


 अरे भाई गाँव में इन सब बातों को फैलते देर नहीं लगती और तो और अगर बात भूत-प्रेत की हो तो और भी लोग मजे ले लेकर हवाईजहाज की रफ्तार से खबर फैलाते हैं। हाँ तो अब मैं आप को बता दूँ कि रमेश के कमरे में लगभग 10-12 मर्द-औरतों का जमावड़ा हो चुका था और रमेश ने भी सबको मना कर दिया कि यह खबर खेतों की ओर गए दादाजी के कान तक नहीं पहुँचनी चाहिए। दरअसल वह अपने आप को लोगों की नजरों में बहुत बुद्धिमान और निडर साबित करना चाहता था।  


 वह तनकर अपनी बीबी के सामने बैठ गया और अपनी बीबी से कुछ जानने के लिए प्रश्नों की बौछार शुरु कर दी। रमेश, कौन हो तुम? रमेश की बीबी कुछ न बोली केवल मुस्कुराकर रह गई। रमेश ओझाओं की तरह फिर गुर्राया, मुझे ऐसा-वैसा न समझ। मैं तुमको भस्म कर दूँगा। रमेश की बीबी फिर से मुस्कुराई पर इस बार थोड़ा तनकर बोली, तुम चाहते क्या हो?  


 बहुत सारे लोगों को वहाँ पाकर रमेश थोड़ा अकड़ेबाजों जैसा बोला, तुममत बोल। मेरे साथ रिस्पेक्ट से बातें कर। तुम्हें पता नहीं कि मैं ब्राह्मण कुमार हूँ और उसपर भी बजरंगबली का भक्त। रमेश के इतना कहते ही उसकी बीबी (चुड़ैल से पीड़ित) थोड़ा सकपकाकर बोली, मैं पंडीजी के श्रीफल पर की चुड़ैल हूँ।  


 अपने बीबी के मुख से इतना सुनते ही तो रमेश को और भी जोश आ गया। उसे लगने लगा कि अब मैं वास्तव में इसपर काबू पा लूँगा। वहाँ खड़े लोग कौतुहलपूर्वक रमेश और उसकी बीबी की बातों को सुन रहे थे और मन ही मन प्रसन्न हो रहे थे, अरे भाई मनोरंजन जो हो रहा था उनका। रमेश फिर बोला, अच्छा। पर तूने इसको पकड़ा क्यों? तुमके पता नहीं कि यह एक ब्राह्मण की बहू है और नियमित पूजा-पाठ भी करती है। रमेश की चुड़ैल पीड़ित बीबी बोली, मैंने इसको जानबूझकर नहीं पकड़ा। इसको पकड़ना तो मेरी मजबूरी हो गई थी। यह इस हालत में अकेले बाहर गई क्यों?  


 खैर अब मैं जा रही हूँ। मैं खुद ही अब अधिक देर यहाँ नहीं रह सकती। रमेश अपने बीबी की इन बातों को सुनकर बोला, क्यों क्या हुआ?डर गई न मुझसे। रमेश के इतना कहते ही फिर उसकी बीबी मुस्कुराई और बोली, तुमसे क्या डर। मैं तो उससे डर रही हूँ जो इस घर पर लटक रहा है और मुझे जला रहा है। अब उसका ताप मुझे सहन नहीं हो रहा है। (दरअसल बात यह थी कि रमेश के घर के ठीक पीछे एक पीपल का पेड़ था और गाँववाले उस पेड़ को बाँसदेव बाबा कहते थे। लोगों का विश्वास था कि इस पेड़ पर कोई अच्छी आत्मा रहती है और वह सबकी सहायता करती है।  


 कभी-कभी तो लोग उस पीपल के नीचे जेवनार आदि भी चढ़ाते थे। और हाँ इस पीपल की एक डाली रमेश के घर के उसी कमरे पर लटकती रहती थी जिसमें रमेश की बीबी रहती थी।)  


 चुड़ैल (अपनी बीबी) की बात सुनकर रमेश हँसा और बोला, जा मत यहीं रह जा। जैसे हमारी एक बीबी है वैसे ही तुम एक और। रमेश के इतना कहते ही वह चुड़ैल हँसी और बोली, यह संभव नहीं है पर तुम मुझसे शादी क्यों करना चाहते हो?  


 रमेश बोला, अरे भाई गरीब ब्राह्मण हूँ। कुछ कमाता-धमाता तो हूँ नहीं। तूँ रहेगी जो थोड़ा धन-दौलत लाती रहेगी।  


 रमेश के इतना कहते ही वह चुड़ैल बोली, तुम बहुत चालू है। और हाँ यह भी सही है कि हमारे पास बहुत सारा धन है पर उसपर हमारे लोगों का पहरा रहता है अगर कोई इंसान वह धन लेना चाहे तो हमलोग उसका अहित कर देती हैं। हाँ और एक बात, और वह धन तुम जैसे जीवित प्राणियों के लिए नहीं है।  


 रमेश अब थोड़ा शांत और शालीन स्वभाव में बोला, अच्छा ठीक है, तुम जरा कृपा करके एक बात बताओ, ये भूत-प्रेत क्या होते हैं, क्या तुमने कभी भगवान को देखा है, आखिर तुम कौन हो, क्या पहले तुम भी इंसान ही थी? चुड़ैल भी थोड़ा शांत थी और शांत थे वहाँ उपस्थित सभी लोग। क्योंकि सबलोग इन प्रश्नों का उत्तर जानना चाहते थे।  


 चुड़ैल ने एक गहरी साँस भरा और कहना आरंभ किया, भगवान क्या है, मुझे नहीं मालूम पर कुछ हमारे जैसी आत्माएँ भी होती हैं जिनसे हमलोग बहुत डरते हैं और उनसे दूर रहना ही पसंद करते हैं। हमलोग उनसे क्यों डरती हैं यह भी मुझे पता नहीं। वैसे हमलोग पूजा-पाठ करनेवाले लोगों के पास भी भटकना पसंद नहीं करते और मंत्रों आदि से भी डरते हैं। रमेश फिर पूछा, खैर ये बताओ कि तुम इसके पहले क्या थी? तुम्हारा घर कहाँ था, तुम चुड़ैल कैसे बन गई।  


 चुड़ैल ने रमेश की बातों को अनसुना करते हुए कहा, नहीं, नहीं..अब मैं जा रही हूं। अब और मैं यहाँ रूक नहीं सकता। वे आ रहे हैं। चुड़ैल के इतना ही कहते हैं कि किसी कमरे में प्रवेश किया और रमेश को डांटा, रमेश। यह सब क्या हो रहा है?  


 रमेश कुछ ऐसा ही कहते हैं, जो पहले देखते हैं कि उनके अधिकारी ने अधिकार का पल्लू झट से अपने सर पर रख लिया और हड़बड़ाकर पलंग पर से उतरकर नीचे बैठ गए और धीरे-धीरे मेरी बेटी-मेरी बेटी कह रही है कि रमेश की भाभी की गोद में से बच्ची को लेकर दूध पिलाने लगी।  


 रमेश ने एक नजर अपने दादाजी की ओर डाली और मन ही मन बुदबुदाया, आप को अभी आना था। सब खेल हार गए।आधे घंटे बाद आओ तो क्या बिगड़ा।

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