अघोरी साधुओ की रहस्यमयी दुनिया - #PASSG

 अघोरी साधुओं की रहस्यमयी दुनिया -





अघोरी साधुओं की रहस्यमयी दुनिया - डरावना


 अहोरी बाबा अघोरी बाबा हिंदू धर्म के अघोर समुदाय से संबंध रखते हैं जो शिवजी की पूजा करते हैं ये समुदाय बहुत ही कम मात्रा में है लेकिन जो है वो अपने अनोखे व्यवहार, एकान्त प्रियता व् रहस्मय कार्यो के कारण बहुत प्रचलित है अहोरी लोगो अघोरी बाबा को इंसानों से दूर श्मशान घाटों, जंगलो या निर्जन स्थानों पर ज्यादा पसंद होता है | क्यूंकि जहा लोगो की जिंदगी खत्म हो जाती है वही से ये काली दुनिया के बादशाह अघोरी लोगो का जीवन शुरू होता है | ये लोग शव संसाधना को ही अपना मूल कर्तव्य मानते हैं कि अघोर संप्रदाय के साधक नर मुंडों की मुद्रा हैं और नर मुंडों को पात्र के तौर पर प्रयोग भी करते हैं। चिता के भस्म के शरीर पर लेपन और चिताग्नि पर व्यंजन बनाना आदि सामान्य कार्य हैं। ये असली रहस्य तो आज तक कोई नहीं जान पाया है | ये लोग मुर्दों में भगवान पूजते हैं |


ये लोग मोटे तौर पर मुर्दे के मांस के शौकिन होते हैं जिससे ये खोपड़ी के बने प्याले में फायदे और पीता है | क्योंकि अघोरी लोग इस तरह खोपड़ी में चौके अघोरी कर्म में आते हैं तथा ये सारे कर्म करने वाले ही सच्चे अघोरी हैं |ये लोग कच्चे मांस खाने से भी परहेज़ नहीं करते हैं | ये लोग प्रतिदिन जलती चिड़ियों से कई हिस्सों को खाने का काम करते हैं


वाराणसी या काशी को भारत के सबसे प्रमुख अघोर स्थान के तौर पर मानते हैं। भगवान शिव के स्वयं के नगरी होने के कारण यहां विभिन्न अघोर साधकों ने तपस्या भी की है। यहां बाबा कीनाराम का स्थल भी एक महत्वपूर्ण तीर्थ है। काशी के अतिरिक्त गुजरात के जूनागढ़ का गिरनार पर्वत भी एक महत्वपूर्ण स्थान है। जूनागढ़ को अवधूत भगवान दत्तात्रेय के तपस्या स्थल के रूप में जानते हैं।


अगोर समुदाय को करीब से जानने के लिए आज तक ऐसी जगहों पर उनकी लाइव फुटेज बनाई गई है जिनके लिए काफी मुश्किल काम था | अहोरी कहते हैं कि हम आत्माओ से बात कर सकते हैं |इस तरह दुनिया में इस तरह के विभिन्न प्रकार के लोग दुनिया में सिर्फ भारत में ही देखने को मिलते हैं |



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